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इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में उठे सवाल: मिथिलांचल में एक भी आईआईटी, आईआईएम क्यों नहीं है?

बिहार का मिथिला क्षेत्र अपने इतिहास, संस्कृति, ज्ञान और कला के लिए पुरे देश में प्रसिद्ध है| कभी यह क्षेत्र अपने समृद्धि के लिए भी प्रसिद्ध था, मगर दुर्भाग्य से अभी पिछड़ेपन का शिकार है| मिथिला के विकाश के मुद्दे को लेकर अब विभिन्न मंचों से आवाज़ उठने लगा है|

शनिवार को यह मुद्दा राजधानी पटना में आयोजित इंडिया टुडे की स्टेट ऑफ स्टेट में भी गरमाया रहा|

सवाल उठे कि पढ़ाई मिथिलांचल के जीन में है, लेकिन अपनी विद्वता के लिए मशहूर मिथिलांचल में एक भी आईआईटी, आईआईएम क्यों नहीं है? पूसा इंस्टिट्यूट भी 2 साल पहले आया है|

पैनल में शामिल बिहार सीएम के राजनीतिक सलाहकार संजय झा ने कहा कि इस इलाके में पढ़ने वाले लोग हमेशा से रहे हैं| लेकिन आज तक इस इलाके में कोई बड़ा इंस्टिट्यूट नहीं खुला| हमारी परंपरा समृद्द है लेकिन उस परंपरा को बचाए रखने के लिए प्रयास करने होंगे| यहां रोजगार का कोई साधन नहीं है कोई इंडस्ट्री भी नहीं लगाई गई, आज हालात ऐसे बन गए हैं कि यहां का आदमी धान काटने के लिए पंजाब जाता है| उन्होंने कहा कि यहीं से युवा पढ़ने के लिए दिल्ली यूनिवर्सिटी या जेएनयू जाते हैं. अगर उन्हें यहीं इंस्टिट्यूट उपलब्ध करा दिए जांएं तो पलायन रुक सकता है.

राज्यपाल के प्रधान सचिव विवेक कुमार सिंह ने कहा कि सबसे पहले हमें यह पता लगाना होगा कि हमारे पास संसाधन क्या हैं| उन्होंने बताया कि इलाके में पानी प्रचुर मात्रा में है, जमीन ऊपजाऊ है लोग बुद्धिमान हैं, लेकिन संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल नहीं हुआ है|

बिहार में न तो हरित क्रांति पहुंच पाई है और न ही चकबंदी हुई है| हमें जितनी उपज मिलनी चाहिए नहीं मिल रही है| ऐसे में पलायन कैसे रुकेगा| उन्होंने कहा कि अगर हम भ्रष्टाचार रोकने में सफल रहे, जमीन पर पूरी उपज मिलने लगेगी तो पलायन अने आप रुक जाएगा|

इतिहासकार रत्नेश्वर मिश्रा ने कहा कि मिथिलांचल को पलायन की दोहरी मार पड़ रही है\ 12वीं सदी में ही विद्वान धन और सम्मान के लिए मिथिलांचल छोड़कर जाने लगे थे| यहां के लोग मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, कश्मीर और सुदूर दक्षिण में जाकर जज, मंत्री और दूसरे अहम पदों पर पहुंचे| इसलिए यहां विद्वता की परंपरा टूट गई. मुसीबतों का सामना करने वाले, इसके लिए राह दिखाने वाले लोग ही नहीं रहे| उन्होंने कहा कि पलायन का दूसरा नुकसान यह हुआ कि पलायन के बाद यहां लौटे लोगों ने या उनके भेजे पैसों से बाहर की बुराइयां भी आईं| उन्होंने कहा कि पहले यहां के लोग शराब ज्यादा नहीं पीते थे, लेकिन अब बच्चे भी बेहिचक ऐसा करने लगे हैं| उन्होंने इसपर चिंता जाहिर की|

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