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Bus to Patna – 7: पटना रहे आज चार साल हो गया

पटना रहे आज चार साल हो गया. केतना ठंडी-गरमी-बरसात बीत गया. ई चार साल में एतना बार घरे गए कि याद हो गया है पटना से मोजफ्फरपुर के बीच में केकरा छप्पर पर कोहड़ा है आ केकरा दुआर पर जर्सी गाय बान्हल है. बस का खलासी भी हमको पहचाने लगा है, बस में हमरा पसंद के फिलिमो चला देता है कब्बो-कब्बो. ईहाँ केतना टारगेट आ फाउंडेशन कोर्स कर लिए. खाना-ऊना बना के, बर्तन-भाड़ा धो के भी पढ़ने के लिए समय बचाइए लेते हैं. कोचिंग से आकर भी चार घंटा सेल्फ-एसटडी भी करते हैं. लेकिन बुझैबे नहीं करता है कहाँ चूक रह जाता है.! हर बार रैंकिंग में लाखों में ठेक जाते हैं. बहुत कम रहता है तइयो तिरासी-चौरासी हजार रहबे करता है.. आ प्राइभेट से इंजीनियरिंग करे के लिए घर का इस्थिति एलाऊ नहीं करता है..

ई बार छठ के बाद जो पटना आए ता बहुत दिन से घर नहीं गए. मने नहीं करता जी है घर जाने का. अब ता गाँव-मोहल्ला का लोग पूछने लगा है कि नौकरी कहिया लगेगा, कहिया तक गार्जियन के होटल में खाओगे.!! अरे मतलब चार साल से पटना रह रहे हैं ता नौकरी लगिए जाएगा.. पटना जादू का छड़ी थोड़बे है..! बारहमा का एगजाम में भी हमारा बस सत्तर परसेंट नंबर था.. दसमा का रिजल्ट देखकर जेतना खुश हुए थे, बारहमा के रिजल्ट देखकर उतना ही मन टूट गया था. सीबीएसई वाला सब के हिसाब से ई बहुत कम नम्बर है. हमारा क्लास का सीबीएसई वाला दोस्त सब कोई बिरानबे परसेंट लाया है ता कोई पंचानमे. ई चार साल के आईआईटी के तैयारी में न्यूमेरिकल सोल्व करे पर इतना ध्यान दे दिए कि थेयोरी ता ठीक से पढ़वे नहीं किए.

आ बिहार बोर्ड का ता आप जनबे करते हैं एग्जाम कितना हार्ड होता है. बित्ता से नापकर नम्बर मिलता है. “बिहार बोर्ड” आ “बिहार बोर्ड टॉपर” का जो मजाक उड़ाते हैं, एक बेर एग्जाम में बइठ के देखें तब पता चलेगा..

बड़का-बड़का वैज्ञानिक जो काम बरस-बरस भर लैब में करते हैं ऊ काम हमको तीन घंटा में कॉपी में लिख कर समझाना होता है. ऊ भी हर्सी-दीर्घी बिना गलत किए.

चार साल में क्या-क्या नहीं झेले हम.!! रात में मकान मालिक से किराया के लिए झगड़ा हुआ ता भोरे उठ के सबसे पहले रूम बदले. जरल बोखार में अपने से उठ के दवा लाने गए आ ब्रेड-दूध गरम करके खाए, साइबर-कएफे में रिजल्ट देखकर दोस्त सब के सामने हंस देते थे कि अरे यार इस बार फिर नहीं हुआ. आ रूम पर आकर खिड़की-केवाड़ी लगाकर दू घंटा तक जो रोए ऊ हमारे दीवार पर साटल पीरियाडिक टेबले जानता होगा. कभ्भी-कभ्भी बुझाता है कि कोनो गलती ता नहीं कर दिए हैं!!

आज पप्पा का फोन आया था. पूरबिया गाछी वाला आधा जमीन बिका गया. लेकिन पप्पा बोले हैं कि तुम चिंता मत करो, तुमको पढ़ाने के लिए घरो-घरारी बेचना पड़ा ता बेच देंगे.. अगिला महीना बहिन का बियाह भी है हमारा. एक्के गो बहिन है जी. डेली फोन पर पूछती है भईया हमरा बियाहो में आओगे कि नहीं.? हमारा किस्मत इतना ख़राब है कि जेईई के एग्जाम वाले दिन ही बहिन का बियाह फिक्स हुआ है.. एगो हमारे लिए ता पंडीजी दिन नहीं बदल देंगे. कहते हैं ईहे दिन लगन सबसे बढ़िया है..

जइसे-तइसे एगजाम दिए, सेंटर से निकलते ही दू ठो पारले-जी खरीदे आ गाँव का बस धर लिए. बस गाँव का चौक पहुँचते-पहुँचते एगारह बजा दिया. जइसे ही बस से उतरे रस्ते में महेन चा भेंटा गए..

“अरे कइसा भाई है तुम जी.! अभी तुम्हारे घरे से ही आ रहे हैं.. तुमसे पहिले ता बरियाती दूरा पर पहुँच गया है..!!”

– Aman Aakash..🖋

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