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केंद्र सरकार बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने पर कर सकता है विचार

केंद्र सरकार से बिहार को विशेष का दर्जा का मांग बहुत पुराना है। नीतीश कुमार इसके लिए पटना से लेकर दिल्ली तक रैली भी कर चुके हैं मगर आजतक यह मांग पूरा नहीं हुआ।

एक बार फिर यह मुद्दा चर्चा में है। केंद्र सरकार द्वारा जाने-माने अर्थशास्त्री एनके सिंह की अध्यक्षता में गठित 15वां वित्त आयोग बिहार समेत कुछ अन्य पिछड़े राज्यों को विशेष राज्य का दर्जा देने के प्रस्ताव पर विचार कर सकता है।

वित्त आयोग के अध्यक्ष सिंह ने एक प्रमुख अखबार से बातचीत में कहा कि यदि इन राज्यों की तरफ से ऐसी मांग रखी जाती है तो उस पर विचार करना आयोग के दायरे में होगा।

आयोग अप्रैल से हर राज्य में जाकर वहां की सरकार, राजनीतिक दलों, संगठनों तथा स्थानीय निकायों के साथ अलग-अलग बैठकें कर भी राय लेगा। इसी कड़ी में वह बिहार, ओडिशा, आंध्र प्रदेश का भी दौरा करेगा।

गौरतलब है कि बिहार, ओडिशा समेत कुछ राज्य लंबे समय से विशेष राज्य दर्जा देने की मांग कर रहे हैं। इधर, आंध्र प्रदेश ने भी इस मांग को तेज कर दिया है।
आंध्र प्रदेश का जब विभाजन हुआ तो तत्कालीन केंद्र सरकार ने उसे विशेष राज्य बनाने की बात कही थी।

केंद्र सरकार के सूत्रों के अनुसार 14वें वित्त आयोग ने विशेष राज्य के दर्जे का विरोध किया था। इसके पीछे कई कारण थे। एक तो वित्त आयोग ने राजस्व में राज्यों की हिस्सेदारी को 32 फीसदी से बढ़ाकर 42 फीसदी कर दिया था। दूसरे, जिन 11 राज्यों को विशेष राज्य का दर्जा दिया गया है, वहां इसका खास प्रभाव नजर नहीं आया है। लेकिन 15वें वित्त आयोग के सामने राज्य अगर विशेष राज्य की मांग को उठाते हैं तो इस मुद्दे पर आयोग फिर विचार करेगा।

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने हाल में वित्त आयोग को पत्र भी लिखा है कि बिहार के लिए विशेष राज्य के दर्जे का प्रावधान किया जाए। ओडिशा एवं आंध्र ने भी विभिन्न मंचों पर ऐसी मांग उठाई है।

ज्ञात हो कि केंद्र राज्यों के बीच 14वें वित्त आयोग के बाद वित्तीय आवंटन का तरीका बदल गया है। लेकिन अभी भी विशेष राज्य का दर्जा प्राप्त जो 11 पर्वतीय राज्य हैं उन्हें केंद्रीय योजनाओं में 90 फीसदी की हिस्सेदारी मिलती है, जबकि अन्य राज्यों को 60 फीसदी।

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