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गुजरात में भी छा गये बिहार के लाल शरद सागर

चाय का दुकान, अखबार का हेडलाइन, प्राईम टाईम की बहस हो या सोशल मिडिया का चौपाल, हर तरफ गुजरात चुनाव छाया हुआ है। वैसे तो यह चुनाव एक राज्य का चुनाव है, मगर इस चुनाव में बहुत कुछ दांव पर लगा है। इस चुनाव के परिणाम देश की राजनीति का रुख तय करेगा।

चुनाव में देश के दो सबसे बड़े राजनीतिक दल आमने-सामने हैं। देश की सबसे पुरानी पार्टी अपना वजूद बजाने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक चुकी है तो दुसरी तरफ देश के प्रधानमंत्री अपना राजनीतिक किला बचाने के लिए खुद मैदान में है।

इस माहौल में जाहिर है कि लोग इसी पर बात करेंगे और मीडिया कि सुर्खियाँ भी यहीं बनेंगी। मगर इसी माहौल के बीच, एक बिहार का लाल गुजरात के अखबारों के सुर्खियों में छाया गया।

गत् 9 दिसम्बर को गुजरात के वडोदरा स्थिति नवरचना विश्वविद्यालय का दीक्षांत समारोह था और उस समारोह के मुख्य अतिथि और देश के इतिहास में अबतक के सबसे युवा कौनवोकेशन स्पीकर के रूप में बिहार के शरद सागर को बुलाया गया था।

इस मौके पर उनके एतिहासिक भाषण को पूरे गुजराती मिडिया ने प्रमुखता से न सिर्फ जगह दिया बल्कि उनके भाषण के पंक्तियों को हेडलाइन बनाकर प्रस्तुत भी किया। वह भी तब, जब उसके अगले दिन, उसी शहर में, समारोह स्थल से कुछ ही किलोमीटर दूर, देश के प्रधानमंत्री का एतिहासिक भाषण होने वाला हो।

दिव्य भास्कर, गुजरात समाचार, टाइम्स ऑफ़ इंडिया एवं अन्य अखबारों ने शरद सागर का विस्तृत भाषण छापा।

शरद कहते हैं –

“पिछले 200 साल में इस देश में सब कुछ बदला लेकिन हमारी शिक्षा व्यवस्था नहीं बदली, हमारे क्लासरूम नहीं बदले। हमारी शिक्षा व्यवस्था आज भी 20वीं सदी की है। हमें इक्कीसवीं सदी में इक्कीसवीं सदी की शिक्षा व्यवस्था की ज़रूरत है। हमारे पाठ्यक्रम का रोचक होना आवश्यक है।

 

“भारत के युवा आइकॉन शरद सागर ने नवरचना यूनिवर्सिटी की दीक्षांत समारोह में उपस्थित सैकड़ों युवा, माता-पिता, प्रोफेसरों एवं मीडिया के कहा कि हमारे युवा राजनीति से दूर जा रहे हैं। हमारी शिक्षा व्यवस्था में नेतृत्व कि कोई जगह नहीं है।

भारत के युवाओं को राजनीति में रूचि लेनी होगी। उन्हें अपने नेताओं से सवाल पूछने होंगे।

भारत के युवाओं में अनंत क्षमता है कि वे 21 वीं सदी को भारतीय सदी बना दें और इसके लिए हमारी शिक्षा पद्धति में बदलाव की आवश्यकता है। समय की मांग है कि शिक्षित और जागरूक युवा सभी छेत्रों में नेतृत्व लें – राजनीति में भी।”

 

इन अखबारों ने शरद सागर की बिहार के एक छोटे से गाँव से हार्वर्ड तक के सफर एवं अमेरिका से लौटकर भारत वापस आने के निर्णय पर भी प्रकाश डाला। गुजरात समाचार ने बिहार के लाल शरद सागर के बारे में लिखते हुए कहा कि सागर को दुनिया भर में एक युथ लीडर एवं विचारक के रूप में जाना जाता है। अखबार में लिखा गया कि शरद ने अपने भाषण में कहा कि “दुनिया अपने आप रातों रात नहीं बदलेगी, हमें दृढ़ संकल्प के साथ काम करते रहना होगा। आप बदलाव लाने के लिए कभी बहुत छोटे या कमज़ोर नहीं होते। याद रखें छोटे छोटे बदलावों से ही एक दिन बड़ा बदलाव आता है।”

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