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पटना का नजारा अदभुत: हर कोई लंगर में दे रहा है सेवा

दोपहर का समय गांधी मैदान के लंगर नंबर दो की रसोई, कोई मटर छील रहे हैं तो कोई आलू काट रहे है तो कोई गाजर घिस रहा है। यह नजारा है लंगर रसोई का। सभी लोग गुरु के सेवा में जुटे है।

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कपूरथला, जालंधर के निवासी तरसेम सिंह लंगर में 26 साल से सेवा दे रहे हैं।
वह हर वर्ष पटना साहिब आकर लंगर में सेवा देते हैं। उन्होंने बताया कि पटना उनके दिल में बसता है। उम्र 65 साल, लेकिन लंगर में सेवा के दौरान इनकी फूर्ति के आगे युवा पस्त दिखते हैं।
लंगर में सेवा देने के लिए कई देशों की यात्रा कर चुके तरसेम सिंह का कहना है कि पटना साहिब अपने आप में अनूठा है। यहां के लोगों में गुरु जी प्रति श्रद्धा अपार है।

गुरदासपुर के संतोख सिंह सेना से रिटायर होने के बाद लंगर में सेवा को ही जीवन का लक्ष्य बना लिया। संगतों की सेवा के लिए पाकिस्तान भी जा चुके हैं। उन्होंने बताया कि अभी तक छह देशों में सेवा दे चुके हैं। गांधी मैदान की व्यवस्था को अदभूत बताया। इतना बड़ा आयोजन पंजाब के बाहर पहली हो रहा है।

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तरणताल से आईं अमरजीत लंगर नंबर दो में सेवा दे रही है। वह जिंदगी के जायका को सेवा के साथ जोड़ती हैं और कहती हैं कि उनका परिवार भी उनके इस काम में हाथ बंटाता है।
वह आजीवन लंगर में सेवा देती रहेंगी। अभी तक के आयोजनों में 350वें प्रकाशोत्सव की तैयारी सबसे भव्य बताती हैं। वह बार-बार बिहार आकर लंगर में सेवा देना चाहती हैं।

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