पटना में हो रहा है बिहार का पहला राष्ट्रीय युवा संसद का आयोजन

IMG-20160905-WA0006

विद्यार्थी जीवन मानव जीवन का सर्वाधिक महत्वपूर्ण समय होता है । इस काल में विद्यार्थी जिन विषयों का अध्ययन करता है अथवा जिन नैतिक मूल्यों को वह आत्मसात् करता है वही जीवन मूल्य उसके भविष्य निर्माण का आधार बनते हैं ।पुस्तकों के अध्ययन से उसे ज्ञान की प्राप्ति होती है परंतु इसके अतिरिक्त अनेक बाह्य कारक भी उसकी जीवन-प्रक्रिया को प्रभावित करते हैं । विद्यार्थियों को यदि राजनीति के मूल सिद्धांतों की जानकारी होगी, तभी वे देश के नागरिक होने का कर्तव्य भली-भाँति निभा सकते हैं ।

अपनी मातृभूमि की सेवा करने के लिए यूँ तो देशभक्ति के चौराहे से कई गलियां निकलती हैं, लेकिन उनमें से एक गली ऐसी भी है जिसमे कदम रखने से लोग, खासकर युवा कतराते हैं, ‘चाणक्य नीति राष्ट्रीय युवा संसद’ के माध्यम से इसी उलझन को दूर कर युवाओं को देश और देश की राजनीती से रूबरू करवाने का बीड़ा उठाने का प्रयास किया गया है |
चाणक्य नीति राष्ट्रीय युवा संसद के संयोजक मणी मभूषण ने कहा कि मुझे यह बतलाते हुए अत्यंत गर्व की अनुभूति हो रही है कि ‘चाणक्य निति नेशनल यूथ पार्लियामेंट’ बिहार का पहला राष्ट्रीय युवा संसद है | इसके अंतर्गत चार समिति निर्धारित की गयी है- लोक सभा, राज्य सभा, बिहार विधान सभा और ऐ.आई.पी.पी.ऍम | इस इवेंट के आयोजन के लिए 22 और 23 अक्टूबर का दिन निर्धारित किया गया है | पुरे देश भर से तकरीबन 400 प्रतिभागियों के भाग लेने की सम्भावना है | इसके साथ ही कई संगठन हमसे जुड़े हुए हैं जैसे कि डॉन बोस्को अकादमी, रेडियो मिर्ची 98.3 एफ.एम, Aapna Bihar |
युवा संसद का अर्थ और उसकी आवश्यकता :
‘युवा संसद’ युवाओं को एक मंच प्रदान करती है जिसकी मदद से नयी पीढ़ी संसद में होने वाली हर उस प्रक्रिया से परिचित हो पाते हैं जिससे वो अनभिज्ञ रहते हैं | इस युवा संसद के माध्यम से युवाओं में एक नयी स्फूर्ति का संचार और नेतृत्व क्षमता का विकास होता है |
चाणक्य नीति राष्ट्रीय युवा संसद ही क्यों :-
आचार्य चाणक्य भारतीय इतिहास के सर्वाधिक प्रखर कुटनीतिज्ञ माने जाते है | चाणक्य एक विव्दान, दूरदर्शी तथा दृढसंकल्पी व्यक्ति थे और अर्थशास्त्र, राजनीति और कूटनीति के आचार्य थे | चाणक्य का नाम राजनीती, राष्ट्रभक्ति एवं जन कार्यों के लिए इतिहास में सदैव अमर रहेगा | लगभग 2300 वर्ष बीत जाने पर भी उनकी गौरवगाथा धूमिल नहीं हुई है | चाणक्य भारत के इतिहास के एक अत्यन्त सबल और अदभुत व्यक्तित्व हैं और इसी तर्ज पर हमारा ये प्रयास है कि बिहार में होने वाले इस प्रथम युवा संसद की ईमारत उनके द्वारा दी गयी नीतियों के नींव पर खड़ी हो |
निष्कर्ष:-
महान चाणक्य की इस भूमि और संसार के सबसे पहले महाविद्यालय के इस साक्षात् प्रमान ने आज भी अपनी गरिमा को धूमिल नहीं होने दिया है | हिंदुस्तान के ललाट पे आज भी बिहार का तेज उतना ही प्रबल और शोभनीय है | हमें आशा है की बिहार के इस पावन धरती पे होने वाला यह प्रथम युवा संसद अपने आप में कई कीर्तिमान स्थापित करेगा और इतिहास के पन्नों में सुनहरे अक्षरों में अंकित होगा |
प्रतिनिधि आवेदन की प्रक्रिया आरम्भ हो चुकी है | प्रतिभागी जल्द से जल्द आवेदन की प्रक्रिया पूरी करें | आवेदन करने के लिए निचे क्लिक करें
https://goo.gl/forms/fnHCOdwmvVN9nwiw2
#चलो_पाटलिपुत्र_चाणक्य_की_खोज_में

Facebook Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Time limit is exhausted. Please reload CAPTCHA.

top