जिंदगी से हार चुके लोगों को जीने की नयी किरण देगी बिहार की बेटी स्वाति की ये नॉबेल

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दुनिया में ऐसा कोई भी व्यक्ति नही होगा, जिसने कभी किसी की आत्महत्या की खबर नही पढ़ी या सुनी होगी।
कभी किसी बड़े सितारे की आत्महत्या की खबर, तो कभी किसी छात्र की आत्महत्या की खबर, तो कभी किसी आम इंसान की सुसाइड की खबर हम अक्सर समाचारों में पढ़ते हैं।
स्वाति के लिए भी अक्टूबर 2013 तक ये खबरें आमलोगों की तरह बस एक खबर ही थी, इससे पहले उसने कभी नही सोची थी की ऐसा घटना उसके सबसे प्रिय लोगों के साथ भी घट सकता है।
तब एक घटना ने स्वाति की पूरी जिंदगी बदल दी।
जब अचानक एक सुबह उसे अपनी माँ की आत्महत्या की खबर मिली। बस कुछ पल में वो पूरी तरह बिखर गयी, उस पल उसे ऐसा लगने लगा की उसके जिंदगी में शायद अब कुछ बचा ही नही।
तब कई रात स्वाति सिर्फ इस सोच में नही सोयी की कैसे वो अपनी माँ को बचा सकती थी।
आत्महत्या से जुड़ी अन्य खबरे जानने के लिए उसने इंटरनेट से इससे जुड़ी जानकारियां हासिल करने लगी और इस खोज में उसने जाना की एक विश्वस्तरीय संस्था INTERNATIONAL ASSOCIATION OF SOCIDE PREVENTION और कई एनजीओ सुसाइड रोकने के लिए कार्य कर रहे हैं।
स्वाति भारत में कार्य करने वाली कुछ एनजीओ जाकर उनके कार्य प्रणाली के बारे में जानकारी भी हासिल की।
अपने रिसर्च से स्वाति ये पता लगायी की जो व्यक्ति आत्महत्या करने को सोच रहे हैं उन्हें पता ही नही चलता की उन्हें अपने समस्या से निजात कैसे मिलेगी और हमे कभी पता ही नही चलता की हमारा अपना कोई आत्महत्या करने को सोच रहा है।

आत्महत्या : एक विश्वस्तरीय समस्या
• WHO के अनुसार विश्व में हर वर्ष 8 लाख लोग आत्महत्या करते हैं।
• हर 40 सेकेण्ड में एक व्यक्ति आत्महत्या करता है।
• भारत में हर 3 सेकेंड में एक व्यक्ति आत्महत्या की कोशिश करता है, जिसमे 37.8% लोग15-29 वर्ष  के उम्र वाले होते हैं जबकि 71% लोग 44 वर्ष के  ऊपर के उम्र के होते हैं।

आत्महत्या पर ढेरों रिसर्च करने के बाद स्वाति पटना के एक मशहूर फैशन फोटोग्राफर सौरभ अनुराज के साथ मिलकर एक फ़ोटो मैगजीन पर काम करना शुरू की, जो लोगों को आशा की नई किरण दे सके और हर वर्ग के लोग इसके द्वारा अपने अंदर की अंधकार को खत्म कर सकें।
तब स्वाति ने Amayra : The Essence Of Life  लिखी।

स्वाति बताती है की वो खुद एक Surviver है इसलिए वो जिंदगी के हर एक पल का महत्व समझती है। उसे लगता है की भले ही वो अपनी मां की जिंदगी नही बचा सकी लेकिन अन्य लोगों के लिए प्रेरणा बन सकती है, स्वाति इसे ही अपने जिंदगी का लक्ष्य मानती है और ये नॉबेल उसका सपना है।

यह एक सौरभ अनुराज की शानदार तस्वीरों से भरा एक उपन्यास है जिसके द्वारा लोगों को आत्महत्या के विरुद्ध जागरूक करने की कोशिश की गयी है।
इस उपन्यास में तस्वीरों के माध्यम से एक लड़की की कहानी को बहुत अच्छी ढंग से दर्शाया गया है जो की एक दिन आत्महत्या करना चाहती है।
उसके साथ क्या होता है..? वो कँहा जाती है..?

सौरभ अनुराज बताते हैं की आज के समय में आत्महत्या एक गहन समस्या बन चुकी यहां तक की छोटे-छोटे स्कुल के बच्चे भी सुसाइड कर रहे हैं, इसलिए समाज के हर उम्र के लोगों को आसानी से इसके प्रति जागरूक करने के लिए फ़ोटो मैगज़ीन एक बेहद अच्छा तरीका है, उन्हें उम्मीद है की लोगों को ये काफी पसंद आयेगा और भविष्य में यह एक सार्थक परिणाम लायेगा।

#SupportAmayra

आप किसी की जिंदगी बचा सके शायद इससे बढ़कर ख़ुशी शायद कुछ नही होगी।

आइये बिहार की इस बेटी की कोशिश का समर्थन करें.
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