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    7 days ago by aapnabihar महाशिवरात्री के अवसर पर निकला शिव बारात। हर-हर महादेव !!
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    1 week ago by aapnabihar बिहार के पटना जिला की निवासी और आजतक की मशहूर एंकर श्वेता सिंह को ENBA (Exchange4media News Broadcasting Awards) 2018 में सर्वश्रेष्ठ हिंदी एंकर और सर्वश्रेष्ठ स्पोर्ट रिपोर्टिंग का अवार्ड दिया गया है।
  • Budha Mahotsva Gaya
    3 weeks ago by aapnabihar Budha Mahotsva, Gaya.
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    2 weeks ago by aapnabihar बिहार के आनंद कुमार के रोल में नजर आयेंगे ऋतिक रौशन।  #AnandKumar   #Super30   #AapnaBihar   #Bihar 
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    1 week ago by aapnabihar हर-हर महादेव बोलो..! तस्वीर मुजफ्फरपुर के प्रसिद्ह भैरवस्थान मंदीर की है।
  • Tag a Bihari girl
    3 weeks ago by aapnabihar Tag a Bihari girl. .
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    2 weeks ago by aapnabihar अंडर 19 क्रिकेट विश्वकप विजेता भारतीय टीम के कप्तान पृथ्वी शॉ भी बिहारी है। बहुत ही कम लोगों को यह पता है कि यह चमकता सितारा गया के मानपुर का रहने वाला है। जय बिहार!
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    3 weeks ago by aapnabihar भारत ने जीता अंडर 19 विश्वकप। बिहार के अनुकूल रॉय बने पूरे सीरीज में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज।
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    3 weeks ago by aapnabihar इस बार झारखंड की कुल आबादी से भी अधिक पर्यटक पहुंचे बिहार। जय बिहार!
  • Name of this vegetable?
    1 week ago by aapnabihar Name of this vegetable?
  • Amazing view of new station road flyover of Patna
    3 weeks ago by aapnabihar Amazing view of new station road flyover of Patna.

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बिहार में अबतक खेल के विकास के लिए कोई कोशिश नही हुई : तेजस्वी


बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने इस बार  ‘मेरी दिल की बात’ श्रंखला के तहत ” ओलंपिक्स, भारत और बिहार” के बारे में लिखा है।  एक खेलाडी रह चुके तेजस्वी यादव ने क्या कहा आप भी पढिए.. 

खेल जगत का सबसे बड़ा उत्सव, खेल की दुनिया का महाकुंभ यानि कि ओलंपिक्स ब्राज़ील के रियो डी जनेरियो में चल रहे हैं। विश्वभर के खिलाडी ओलंपिक्स में अपने अपने देशों का प्रतिनिधित्व करने रियो में जमा हुए हैं। इन सभी खिलाड़ियों के सालों की मेहनत और तपस्या को चन्द मिनटों या सेकंडों में आजमाने का समय आ गया है।

भारत के खिलाडी भी अपने-अपने खेलों और उनके विभिन्न वर्गों में क्वालीफाई करके ओलंपिक्स में भाग लेने के लिए पहुँच गए हैं। अबतक कुछ प्रतिस्पर्धा में बने हुए हैं तो कुछ आगे के राउंड में प्रवेश कर अपनी दावेदारी को कायम रखे हुए हैं। भारत के खिलाडी इस ओलंपिक्स में लंदन ओलंपिक्स के मुकाबले और अधिक पदक अंक तालिका में जोड़ पाए तो हर भारतीय को और अधिक ख़ुशी और गर्व होगा।

 

मुझे इस बात की तो ख़ुशी है कि बड़ी तादाद में भारतीय खिलाड़ी इस बार ओलंपिक्स में भाग ले पा रहे है। पर एक बिहारी होने के नाते मुझे अत्यंत दुःख होता है कि बिहार का कोई भी खिलाडी इस रियो ओलंपिक्स में बिहार का नाम रौशन करने के लिए ओलंपिक्स तक का सफर तय नहीं कर पाया है, इस बात का बहुत दुःख है। शायद बिहार में खेल कूद को बढ़ावा देने की कोई ईमानदार कोशिश नहीं हुई है और अभिभावक भी बच्चों को खेलों के प्रति ज्यादा प्रोत्साहित नहीं करते। कुछेक राज्यों को छोड़कर सभी जगह यही स्थिति है। ना तो कभी ज़मीनी स्तर पर काम करते हुए प्रतिभा को निखारने का प्रयास किया गया, ना खेल कूद को प्रोत्साहन देने के लिए उचित धनराशि आवंटित की गई है और ना ही प्रतिभा निखारने के लिए आधारभूत संरचना का निर्माण किया गया। जो बात दिल को और कचोटता है वह है यथास्थिति को बदलने के प्रति उदासीनता।

यह वास्तविकता है कि खेल कूद में सालों झोंकने के बाद भी कुछेक खिलाड़ी ही विश्व स्तर पर नाम कमा पाते है। कुछ राष्ट्रीय स्तर तक नाम कमाते हैं तो कुछ राज्य स्तर तक। किसी का खेल जीवन सिस्टम की भेंट चढ़ जाता है तो किसी का खेलों में राजनीती की भेट चढ़ जाता है। खेल से बहुत से लोगों को ढंग का रोज़गार मिल जाए, ऐसा भी नही है। पर खेलो और खिलाड़ियो से भावनात्मक जुड़ाव पूरे देश का होता है। देश के खिलाड़ियो के जीत को अपनी जीत मानते है और उनके हार को अपनी हार। खेलो से कभी पूरे देश में हर्षोल्लास का वातावरण बन जाता है तो कभी मातम का माहौल। कोई खेल को जंग मानता है तो कोई मात्र मनोरंजन का साधन। पर इसमें कोई दो राय नही है कि समय समय पर खेल हमे स्वयं पर और देश पर गर्व करने का अवसर देते है और राष्ट्र निर्माण में अपना ही योगदान देते है। खेल को नज़रअंदाज़ कतई नहीं करना चाहिए।

 

मणिपुर, हरियाणा और पंजाब जैसे छोटे और कम आबादी वाले राज्य खेल कूद के मामले में बिहार से कही आगे है। हरियाणा और पंजाब में एक निर्धारित स्तर पर नाम कमाने पर सरकारी नौकरी दी जाती है । और अच्छा करने पर पदोन्नति भी दी जाती है। मणिपुर, जो एक छोटा राज्य है, वह दिखाता है कि अगर खेल कूद को संस्कृति का हिस्सा बना दिया जाए तो प्रतिभा स्वयं आगे आने लगती है। हमे बिहार में भी खेल कूद की संस्कृति का विकास करना होगा। इसे जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाना होगा। माता-पिता और शिक्षको को जीवन में खेलकूद और स्वास्थ्य के महत्व को समझना होगा। खेल कूद ना सिर्फ हमे शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ बनाते है, बल्कि चुनौतियो का सामना करना, तालमेल बिठाना, लक्ष्य साध कर मेहनत करना और एक दूसरे की मदद करते हुए आगे बढ़ना सिखाती है। व्यक्तित्व के पूर्ण विकास के लिए खेलो के महत्व को बिहारवासियों और व्यवस्था को समझना ही पड़ेगा।

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