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#BihariKrantikari: #12 इन सात वीरों ने मर के भी तिरंगे की शान बढ़ाई

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“गिरते हैं शहसवार ही मैदान-ए-जंग में,
वो तिफ़्ल क्या गिरेंगे जो घुटनों के बल चले”

किसी शायर की ये पंक्तियाँ उन सात वीर सपूतों की दृढ़ इच्छाशक्ति, देशप्रेम और समर्पण को दर्शाने के लिए बिल्कुल सही लगती हैं, जिनकी मूर्ति बिहार राजभवन परिसर में आज भी गर्व से देखी जाई जाती है|

11 अगस्त 1942 का दिन था| महात्मा गांधी की तरफ से भारत छोड़ो आन्दोलन का बिगुल बज चुका था| उन्होंने अहिंसा के साथ-साथ ‘करो या मरो’ का नारा भी दिया था| ये वो समय था जब बिहार में पटना स्वतंत्रता की लड़ाई का मुख्य केंद्र बना हुआ था|
6000 निहत्थे छात्रों की टोली, निकली पटना सेक्रेटेरिएट पर तिरंगा लहराने की धुन सवार किये हुए| W.G. आर्चर उस समय पटना के डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट थे| हिंदुस्तानी छात्रों द्वारा यूँ भवन में झंडा फहराया जाना, ब्रिटिश हुकूमत के शान के खिलाफ था| 2 बजे तक ब्रिटिश इन्डियन मिलिट्री पुलिस ने पुरजोर विरोध किया, और छात्रों ने उतना ही संघर्ष| निहत्थे झंडे को पटना सेक्रेटेरिएट पर फहराना ब्रिटिशों को भारत छोड़ने की धमकी देने जैसा ही था|
ये संघर्ष चलता रहा| लेकिन तभी आर्चर ने पुलिस को उन सभी पर गोलीबारी करने का आदेश दे दिया जो झंडा लिए आगे बढ़ रहे थे| बिहार मिलिट्री ने गोली चलाने से इनकार कर दिया| गोरखा गैंग को बुलाया गया, गोलीबारी शुरू हुई| छात्र अहिंसक थे, उनके पास कोई हथियार नहीं था, फिर भी ये कदम उठाया गया|
गोलीबारी जब रुकी, तब तक 7 छात्र शहीद हो चुके थे और 14 घायल| इन शहीदों की सूची देखिये, सिर्फ एक छात्र ही कॉलेज का था, बाकी सभी स्कूल के थे, दसवीं और नौवीं के छात्र|
इन सात छात्रों की जीवंत मूर्ति आज भी आप पटना राजभवन कार्यालय में देख सकते हैं| धोती-कुर्ता और गाँधी टोपी में बनी ये मूर्ति प्रत्यक्षतः दर्शाती है कि कैसा जज्बा था उन छात्रों में| कैसा समर्पण था अपने देश के लिए| कैसी भक्ति थी जिसने जान की परवाह भी न करने दी| इनका लक्ष्य इस मूर्ति में भी देखा जा सकता है| ये एक संकल्प, एक प्रण ही तो था जिसने इतने बड़े त्याग से भी समझौता न करने दिया, मन को डिगने न दिया|

इन सात लड़ाकों को आज पूरा देश नमन करता है| ये वो क्रांतिकारी थे, जिन्होंने पटना में बुझ रही स्वतंत्रता की लड़ाई की चिंगारी को हवा देने का काम किया| जिन्होंने इस पवित्र मिशन को अपने खून से और पावन कर दिया| जिन्होंने मर के भी तिरंगे की शान बढ़ाई| इनके नाम थे –

• उमाकांत प्रसाद सिन्हा (रमन जी)- राम मोहन रॉय सेमिनरी, कक्षा 9
• रामानंद सिंह- राम मोहन रॉय सेमिनरी, कक्षा 9
• सतीश प्रसाद झा- पटना कॉलेजियेट स्कूल, कक्षा 10
• जगतपति कुमार- बिहार नेशनल कॉलेज, स्नातक पार्ट 2
• देविपदा चौधरी- मिलर हाई स्कूल, कक्षा 9
• राजेन्द्र सिंह- पटना हाई इंग्लिश स्कूल, कक्षा 10
• रामगोविन्द सिंह- पुनपुन हाई इंग्लिश स्कूल, कक्षा 9

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नेहा नूपुर
पलकों के आसमान में नए रंग भरने की चाहत के साथ शब्दों के ताने-बाने गुनती हूँ, बुनती हूँ। In short, कवि हूँ मैं @जीवन के नूपुर और ब्लॉगर भी।
http://www.nehanupur.com

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