खुशखबरी: विश्व बैंक बिहार को देगा 29 करोड़ डॉलर

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दिल्ली: विश्व बैंक ने बिहार में गरीबों को रोजी-रोटी के बेहतर मौके उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार और केंद्र सरकार के साथ शुक्रवार को 29 करोड़ डॉलर के कर्ज का करार किया। बिहार ट्रांसफॉर्मेटिव डेवलपमेंट प्रोजेक्ट (जीविका-2) नामक इस परियोजना से 300 प्रखंडों और 32 जिलों के लोगों को लाभ मिलेगा।

 

विश्व बैंक ने बताया कि इस धन राशि का उपयोग ग्रामीणों को स्वयं सहायता समूह बनाने तथा बाजार, सार्वजनिक सेवाओं तथा वित्तीय सेवाओं तक पहुँच उपलब्ध कराने के लिए किया जायेगा। उन्हें वाणिज्यिक बैंकों तथा अन्य औपचारिक प्रतिष्ठानों के जरिये वित्तीय सहायता मुहैया कराई जायेगी।
परियोजना में महिलाओं को प्राथमिकता दी जायेगी।महिलाओं की स्वामित्व वाली कृषि उत्पाद कंपनियों की स्थापना के लिए मदद की जायेगी।महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों को भी पैसे मुहैया कराये जायेंगे।

 

परियोजना में महिलाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। महिलाओं की स्वामित्व वाली कृषि उत्पाद कंपनियों की स्थापना के लिए मदद की जाएगी। महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों को भी पैसे मुहैया कराए जाएंगे। समेकित बाल विकास कार्यक्रम तथा स्वच्छ भारत अभियान के जरिये पोषण, हाइजिन तथा साफ-सफाई को बढ़ावा इस परियोजना का लक्ष्य होगा।

 

इन समूहों को नौ हजार 500 ग्रामीण संगठनों के तहत रखा गया जिन्हें पुन: 161 क्लस्टर लेवल फेडरेशन बनाकर उनके तहत लाया गया।दूसरे चरण में आजीविका-2 के तहत उन 32 जिलों और 300 प्रखंडों को शामिल किया जायेगा जो पहले चरण का हिस्सा नहीं थे।
परियोजना के ऋण दस्तावेज पर भारत सरकार की ओर से आर्थिक मामले विभाग में संयुक्त सचिव राज कुमार, बिहार सरकार की ओर से ग्रामीण विकास विभाग में सचिव अरविंद कुमार चौधरी तथा विश्व बैंक की तरफ से भारत में कार्यवाहक निदेशक जॉन ब्लामकिस्ट ने हस्ताक्षर किये।

 

विश्व बैंक द्वारा उपलब्ध कराये गये इस ऋन से बिहार के विकाश को और ज्यादा रफ्तार मिलेगी। बिहार में चल रहे महिला शक्तिकरण को और बल मिलेगा तथा ग्रामीण क्षेत्र के विकाश में तेजी आएगी।

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