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बिहार के दो लाल हरियाणा पुलिस में एक साथ बने पुलिस महानिदेशक

बिहार के लोग लोग विश्वभर में राज्य का नाम गौरव कर रहे हैं, ऐसे में ये खबर बिहारियों के लिए कोई आश्चर्य की बात नही है।

हरियाणा पुलिस में पहली बार बिहार मूल के दो आईपीएस ने एक साथ शिखर (पुलिस महानिदेशक के पद तक) पर पहुंचने का गौरव हासिल किया है। दोनों 1986 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। पीआर देव बिहार के बेतिया के रहने वाले हैं जबकि डा. बीके सिन्हा बिहार के गया निवासी हैं। देव डेपुटेशन पर राइट्स लिमिटेड (रेल इंडिया टेक्निकल एंड इकोनोमिक सर्विस) में मुख्य सतर्कता अधिकारी हैं जबकि डा. सिन्हा के पास विशेष पुलिस महानिदेशक (स्टेट विजिलेंस) की जिम्मेदारी है। दोनों को एक साथ कुछ दिनों पहले ही पदोन्नत किया गया है।

 

बिहार मूल के आईपीएस देश के कई राज्यों के पुलिस महकमे में शिखर पर पहुंचे हैं। अ‌र्द्ध सैनिक बलों में भी कई आईपीएस शिखर तक पहुंचे हैं। हरियाणा में पहली बार एक साथ दो आईपीएस शिखर पर पहुंचे हैं। दोनों की महकमे में विशेष पहचान है। दोनों के एक साथ अपने महकमे में शिखर पर पहुंचने से बिहार मूल के हरियाणा में रह रहे लोगों में खुशी का आलम है। आर्यावर्त जन कल्याण संघ के संरक्षक विनय कृष्ण एवं पूर्वाचल एकता मंच के महासचिव सत्येंद्र सिंह कहते हैं कि दोनों अधिकारियों की इस ऊंचाई से बिहार मूल के बच्चों को विशेष रूप से प्रेरणा मिलेगी। बच्चे अपने प्रदेश से बाहर जाकर भी बेहतर करने के लिए प्रेरित होंगे। एक-दूसरे राज्य में जाकर बेहतर करने से राज्यों के लोगों के बीच निकटता भी बढ़ती है। बता दें कि कुछ महीने पहले ही मूल रूप से गुड़गांव के सरहौल निवासी एसके भारद्वाज बिहार में पुलिस महानिदेशक पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। सेवानिवृत्ति पर गुड़गांव में रह रहे बिहार मूल के लोगों ने उनका गर्मजोशी से अभिनंदन किया था।

 

दिल में बिहार से कम नहीं हरियाणा

 

राइट्स में मुख्य सतर्कता अधिकारी पीआर देव कहते हैं कि बिहार जन्मभूमि है लेकिन कर्मभूमि हरियाणा ही है। हरियाणा से ही नाम, मान व सम्मान मिला है। अब तो कई बार ऐसा लगता है जैसे हरियाणा के ही हैं। विभिन्न पदों पर रहते हुए बेहतर करने का अवसर मिला है। आगे भी बेहतर करने का अवसर मिलेगा। यदि व्यक्ति सकारात्मक दृष्टिकोण से काम करे तो वह कहीं भी जाकर अपनी बेहतर पहचान बना सकता है। अधिकतर लोग काम देखते हैं, यह नहीं देखते कि कहां का रहने वाला है, किस जाति का है, किस धर्म का है। आवश्यकता है कि जहां भी जिम्मेदारी मिले, उसे ईमानदारी से निभाने की। जब आप जिम्मेदारी निभाने में कोताही करते हैं तभी लोग बारे में लोग नकारात्मक सोचने को विवश होते हैं।

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