बिहारी विशेषता

फ्रांस की सबसे बड़ी ट्रांसपोर्ट कंपनी बिहार में लगा रही है कारखाना

मधेपुरा : बिहार के मधेपुरा में ग्रीन फील्ड विद्युत रेल इंजन कारखाने का सपना आकार लेने लगा है।  श्रीपुर चकला गांव के पास अधिग्रहित तीन सौ एकड़ जमीन का भूमी पूजन दो महिने पहले (मई) में हो चुका है साथ ही औरकारखाना निर्माण की दिशा में विभागीय कार्रवाई भी पूर्ण हो चुका है और वहां पर कारखाना निर्माण का  काम भी तेजी से जारी है।

 

ज्ञात हो कि फ्रांस की ऑल्सटॉम कंपनी को मिली मधेपुरा में इंजन कारखाना बनाने की जिम्मेदारी सौंपी गयी थी. मालूम हो कि रेल मंत्रालय ने बिहार के वर्षों से लंबित चली आ रही दो रेल इंजन कारखाना की टेंडर प्रक्रिया को पूरा कर निर्माण की दिशा में युद्ध स्तर पर कार्य आरंभ कर दिया था.

 

इलेक्ट्रिकल इंजन कारखाना

इसकेलिए हाल ही में करीब 132 करोड़ की लागत से 306.07 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया है। रेलवे बिहार के मधेपुरा में स्थापित होने वाले संयुक्त उपक्रम से 11 साल में 900 इलेक्ट्रिक रेल इंजन बनाएगा। दस साल में मढ़ौरा में 4500 और 6000 हॉर्स पावर के 1000 इंजन तैयार किए जाएंगे। कारखाना बनाने की जिम्मेदारी फ्रांसीसी कंपनी को दी गई है जो तीन साल में वह काम पूरा करेगी।

 

बीस हजार करोड़ से बनेगा कारखाना

मधेपुरा में बीस हजार करोड़ की लागत से रेल विद्युत इंजन कारखाने का निर्माण होना है. मधेपुरा में बनने वाले विद्युत रेल इंजन कारखाना के निर्माण की जिम्मेदारी फ्रांस की सबसे बड़ी ट्रांसपोर्ट कंपनी ऑल्सटॉम को दी गयी है. ये परियोजनाएं पूरी तरीके से एफडीआइ (प्रत्यक्ष विदेशी निवेश) पर आधारित है. यह प्रधानमंत्री की मेक इन इंडिया की अब तक की सबसे बड़ी सफलता मानी जा रही है.

 

पीएम ने किया था वादा 

एक नवंबर को जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मधेपुरा आये थे, तो उन्होंने चुनाव के बाद मधेपुरा में लंबित रेल इंजन परियोजना को गति देने की बात कही थी. इसके बाद यहां काफी उथल-पुथल के बाद रेल कारखाना का सपना धीरे-धीरे आकार लेने लगा.

हालांकि 2007 में तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने मधेपुरा और मढ़ौरा में रेल इंजन कारखाना बनाने की घोषणा की थी लेकिन तब तक रेलवे राशि के अभाव का रोना रोती रही थी.

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