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बिहारी विशेषता

कलाम सर! आप बहुत याद आते हो!

कहते हैं न एक ‘खास’ व्यक्ति हमेशा ही आम दिखता है, जीता है. ऐसे ही थे भारत के ‘रत्न’ एपीजे अब्दुल कलाम. ‘मिसाइल मैन’, ‘जनता के राष्ट्रपति’, ‘मार्गदर्शक’, छात्र के शिक्षक और न कितने नामों से हर दिल पर ‘राज’ करने वाले पूर्व राष्ट्रपति की आज पहली पुण्यतिथि है. हम उनकी उपलब्धियां, देश के प्रति उनका अगाध प्रेम, देश के विकास में उनके योगदान को भुलाये नहीं भूल पायेंगे. संसार से उन्होंने जो कुछ लिया वह पूरा का पूरा समाज को लौटा दिया. ईश्वर में गहरी आस्था रखने वाले कलाम हमारी सभ्यता के तीनों गुण- दम(आत्म नियंत्रण), दान और दया से भरपूर थे. बचपन से गीता व कुरान दोनों पढ़ने वाले सरल स्वभाव के कलाम कामयाबी के शिखर तक यूं ही नहीं पहुंचे. उनका संघर्ष भरा जीवन हर शख्स़ के लिए प्रेरणादायी है. भारत की वैज्ञानिक विरासत में कलाम के महान कार्य और योगदान प्रमुखता से दर्ज हो चुके हैं. उनकी सोच जिंदा है और रहेगी. उनकी महानता अमर रहेगी. डॉ कलाम सर कम बोलते थे लेकिन हमेशा आम लोगों की भलाई के लिए नये उपायों के बारे में सोचते रहते थे. वे हर तरह के लोगों का ध्यान रखते थे. समाज तथा विश्व किस तरह से बेहतर बनें, इस बारे में उनका चिंतन काफी गहरा था. आज के दौर में कठिन होना आसान है, सहज होना बहुत ही मुश्किल है. यही सहजता कलाम में थी, जो उन्हें महान बनाती थी. वे बहुत ही कमाल के इंसान थे. अक्सर बड़े-बुजुर्ग बच्चों को डांटते-फटकारते रहते हैं लेकिन कलाम कभी ऐसा नहीं करते थे. उन्हें बच्चों से बहुत लगाव था और कभी-कभी तो बच्चों के बीच जाकर वे खुद भी बच्चे बन जाते थे. हमें उनके जीवन और कार्यो के बारे में ज़रूर विस्तार से जानना-समझना चाहिए, उनके कार्यो से प्रेरणा लेनी चाहिए.

तमिलनाडु के रामेश्वरम कस्बे के एक निम्न मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मे पूर्व राष्ट्रपति डॉ एपीजे अब्दुल कलाम का बिहार से खास लगाव था. यही वजह थी कि वे हमेशा बिहार आते रहते थे.

आईये जानते हैं डॉ कलाम सर के बिहार से लगाव को:-

डॉ कलाम सर कहते थे, मैं जब भी बिहार आता हूं, सचमुच चकित होता हूं कि किस प्रकार बिहार की धरती एकीकृत आध्यात्मिक इकाई के रुप में विकसित हुई. डॉ कलाम बिहार दौरे के दौरान पावापुरी, मुंगेर के बिहार स्कूल ऑफ योगा, सौ साल पुराना मोहम्मद अली द्वारा निर्मित पवित्र खानकाह रहमानी, महाबोधि मंदिर, तख़्त श्री हरिमंदिर में घूम चुके थे.

डॉ कलाम सर के पास बिहार के लिए 10 मिशन थे:-
1. कृषि,चीनी उद्योग, डेयरी विकास, बागवानी, खाद्य प्रसंस्करण.
2. शैक्षणिक और उद्यमिता विकास.
3. वैश्विक मानव संसाधन.
4. पुनर्जागरण : नालंदा अंतर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालय
5. हेल्थकेयर मिशन.
6. बाढ़ निदान और जल प्रबंधन.
7. ग्रामीण समृद्धि पर जोर.
8. बुनियादी ढांचा विकास.
9. पर्यटनस्थलों का विकास.
10. ई-गवर्नेंस.

डॉ कलाम कहते थे कि द्वितीय हरित क्रांति की शुरुआत बिहार से ही होगी.
मिशन बिहार 2020 का सपना बुनने वाले पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम सर ने पटना जिले के पालीगंज प्रखंड के खेतों की पगडंडियों पर किसानों को लगातार आगे बढ़ने की प्रेरणा दी थी. उन्होंने पालीगंज में कहा था कि यहां के किसान कृषि के अपने अनुभवों से पूरे बिहार को लाभान्वित करें. एक बार बिहार दौरे में डॉ़ कलाम सर पालीगंज के 15 चुनिंदा किसानों से मिले और उनसे परंपरागत खेती में आधुनिक और वैज्ञानिक तकनीक के इस्तेमाल के फायदे, औषधीय और सुगंधित पौधों की खेती की स्थिति सहित कई विषयों पर बात की. इसके अलावे उन्होंने लेमनग्रास, जावा स्रिटोनेला और तुलसी के पौधों का फीडबैक लिया था. वर्ष 2003 में कलाम पहली बार पालीगंज आये थे और उनकी प्रेरणा से इलाके में आधुनिक और वैज्ञानिक तरीके से खेती की किसानों ने शुरुआत की थी. वे बिहार आते थे तो पालीगंज जरूर जाते थे.
डॉ. कलाम सर मई 2003 को नालंदा की यात्रा पर आए थे. पावापुरी में भगवान महावीर की निर्वाण भूमि और जल मंदिर का दर्शन कर पंच पहाडिय़ों के बीच राजगीर में बन रहे आयुद्ध निर्माणी का निरीक्षण किया था. रक्षा विशेषज्ञों के साथ आयुद्ध निर्माणी में कैलिबर 150 के गुर बताए थे. राजगीर परिसदन में उन्होंने लंच लिया, इसमें सादी रोटी, पीली दाल, भिंडी दो प्याजा और दही परोसा गया था.

16 जुलाई 2009 को डॉ कलाम पटना के संत माइकल हाई स्कूल में आए थे. उन्होंने बच्चों से सबसे पहली लाइन यही कहा- आप में कलाम से भी बेहतर बनने की क्षमता है. इतने में एक बच्चे ने पूछा, कैसे? कलाम सर ने जवाब दिया, ‘मैंने स्कूली शिक्षा तमिल मीडियम से पढ़ी थी. कॉलेज में अंग्रेजी में पढ़ाई होती थी. बहुत परेशान होता था. आप तो इतने अच्छे स्कूल में पढ़ रहे हैं. आप कलाम से बेहतर कर सकते हैं.’ कलाम सर ने बच्चों से एस्ट्रो फिजिक्स-मॉडर्न फिजिक्स पर बात की. डॉ कलाम बिहार दौरे के दौरान एनआईटी पटना के निदेशक डॉ. एके डे को बिहार में पानी के प्रबंधन पर रिसर्च करने की बात कही थी.

डॉ कलाम सर बिहार में छात्रों को संबोधित करते हुए बोले थे कि- पंछी की तरह उडऩा सीखिए, मन में हार की भावना मत रखिए. जीवन में निराश नहीं होना, प्रयास पूरी ईमानदारी से होना चाहिए. आप में कलाम से भी बेहतर बनने की क्षमता है. किसी को आइडियल मानने से अच्छा है उससे प्रेरणा लीजिए. जो पढ़े-लिखे नहीं हैं उन्हें पढ़ाइए.

महान गणितज्ञ आर्यभट्ट और पटना से उनके रिश्तों की बानगी कलाम सर ने बयां की थी. उन्होंने कहा था कि बिहार प्रतिभा संपन्न राज्य है. कलाम ने छात्रों को सपना देखने और आसमान की उड़ने की प्रेरणा कविता पाठ करके दी थी. उन्होंने कहा था कि सपने देखो, सपनों में लीन हो जाओ, जागती आंखों में भी सपने देखो.

डॉ कलाम ने ‘यू हैव ड्रीम बीफॉर योर ड्रीम्स कैन कम टू’ विषय पर छात्रों को सफलता का मंत्र देते हुए कहा था कि, नकारात्मक हताशा और निराशा के बीच प्रकृति की सकारात्मकता देखें. कलाम सर ने छात्रों को सीख दी थी कि नकारात्मकता के बीच प्रकृति में कुछ न कुछ सकारात्मकता दिखती ही है. फूलों का मुस्कराना, चिड़ियों का चहचहाना देखकर सकारात्मक सोच. एक छात्र ने कलाम साहब से पूछा था कि क्या वो मिसाइलमैन बन सकता है? तो कलाम सर ने पीठ पर हाथ रखकर कहा था तुम मिसाइलमैन से भी ज्यादा आगे जा सकते हो.

नालंदा अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय को फिर से शुरू कराने का विचार सबसे पहले वर्ष 2006 में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने दिया था. उस समय वे राजगीर प्रवास पर थे. पुराने विश्वविद्यालय के खंडहर से करीब 10 किलोमीटर दूर राजगीर में बनाए जा रहे इस विवि के निर्माण योजना की घोषणा उसी साल भारत, चीन, सिंगापुर, जापान व थाइलैंड ने संयुक्त रूप से की. बाद में यूरोपीय संघ के देशों ने भी इसमें दिलचस्पी दिखाई. डॉ कलाम के इस सोच को धरातल पर उतारने में कुल आठ साल लग गए.

बिहार दौरे के दौरान डॉ कलाम ने बाढ़ की समस्या के समाधान को सबसे बड़ी तकनीकी चुनौती कहा. समाधान के लिए 500 किलोमीटर वाले स्मार्ट जलमार्ग की बात कही, बोले इसे नहरों से जोड़ा जाए. गंगा के क्षेत्र में, कोसी के प्रवेश बिंदुओं पर बड़े कुएं बनें.

बहुमुखी प्रतिभा के धनी मिसाइल मैन डॉ कलाम सर के पैगाम ने बिहार के युवा मतदाता में कमाल कर दिया था. 16वीं लोकसभा चुनाव में पूर्व राष्ट्रपति द्वारा युवाओं को मतदान के लिए प्रेरित करने वाले संदेश के प्रचार-प्रसार से प्रेरित होकर 45 लाख नये मतदाता बिहार में बनाये गए थे जिनमें छह लाख से ज्यादा युवा मतदाता थे.

डॉ कलाम सर 2008 में श्रीकृष्ण मेमोरियल हाल, पटना में बिहार के विकास के लिए ज्ञान आधारित समाज बनाने पर जोर दिए थे. उन्होंने कहा था कि:-
‘व्यक्ति, परिवार, समाज, प्रदेश, देश और विश्व के विकास के लिए ज्ञान आधारित समाज का निर्माण करना होगा. ज्ञान आधारित समाज ही किसी देश के लिए सघन संपदा का निर्माण कर सकता है. इसी से शिक्षा, स्वास्थ्य और संरचनाओं को बेहतर बना कर जीवन स्तर को सुधारा जा सकता है. इन्हें पाने के लिए ज्ञान के साथ साहस, अदम्य जिजिविषा और स्वयं में अटूट विश्वास का संचार आवश्यक है. इन सब गुणों को अपनाने के बाद बिहार फिर ज्ञान के क्षितिज के सबसे चमकीले नक्षत्र के रूप में अपना स्थान हासिल कर लेगा. यही मेरा संदेश है.’
– डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम

उम्मीद है हम बिहारवासी डॉ कलाम सर के सपनों को पूरा करेंगे. उस हीरे की चमक और रोशनी हमें उस मंजिल तक पहुंचाएगी जो उस स्वप्नद्रष्टा ने देखी थी. उन्होंने “कल के बिहार” का ख्वाब देखा था| हम बिहारवासी उनके ख्वाब(लक्ष्य) को अवश्य पूरा करेंगे.

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नेहा नूपुर
पलकों के आसमान में नए रंग भरने की चाहत के साथ शब्दों के ताने-बाने गुनती हूँ, बुनती हूँ। In short, कवि हूँ मैं @जीवन के नूपुर और ब्लॉगर भी।
http://www.nehanupur.com

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