IMG_20160603_130102_246
खबरें बिहार की बिहारी विशेषता

कोरियाई महिला बिहार में बेचती है सत्तू…कहती है ‘मैं आधी बिहारी हूँ’..

पटना: अगर आप बिहार आए और आपको को एक कोरियाई महिला बिहार में सत्तू बेचते मिल जाए तो चौकियेगा मत।  

 

जी हाँ दक्षिण कोरिया के शहर चुन चीआन की निवासी ग्रेस ली क़रीब 20 साल पहले बिहार आ कर बस गईं. पहले वो ख़ुद सत्तू की दीवानी हुईं और बाद में अपने कोऱियाई दोस्तों को इसका दीवाना बनाया.

 

ग्रेस ली और उनके पति यांज गिल ली को 2005 में स्वास्थ्य संबंधी कुछ परेशानियां हुईं. अपने एक बिहारी दोस्त की सलाह पर ग्रेस ने सत्तू को अपने जीवन का हिस्सा बना लिया. उसके बाद जो नतिजा आया वह बहुत अच्छा था।  उनके पति को पेट सम्बंधी रोग से मुक्ति मिल गई और खुद भी ऊर्जा से भरा महसूस करने लगी।

 

दरअसल सत्तू भुने हुए अनाज खासकर, जौ और चने का आटा है. बिहार के लोगों के जीवन में रचा बसा सत्तू प्रोटीन से भरपूर होता है. यह पचने में आसान होता है. शरीर को ठंडा रखने की अपनी ख़ासियत की वजह से गर्मी में लोग इसे खूब खाते हैं.

 

उन्होंने 20 लोगों की मदद से सत्तू तैयार करना शुरू किया. जिसे उन्होंने दक्षिण कोरिया में अपने दोस्तों को भेजा. उन्होंने भारत में रहने वाले अपने कोरियाई मित्रों को भी सत्तू भेजा.
ग्रेस ली हर साल 40 किलो सत्तू दक्षिण कोरिया और दो क्विंटल सत्तू भारत में रहने वाले अपने कोरियाई दोस्तों को 500 रुपए प्रति किलो की दर पर बेचती हैं.
दिल्ली में 20 साल से रह रहे किम सुंग सु उनके ग्राहकों में से एक हैं. वो 2006 से ही सत्तू पी रहे हैं. 65 साल के किम सुंग सु ने फ़ोन पर बताया कि वो छह महीने का सत्तू मंगाकर रख लेते हैं और उसे सुबह शहद के साथ पीते हैं.

 

ली ने अपने इस ग्राहक के सुझाव पर काम करना शुरू कर दिया है. उन्होंने दिसंबर 2015 में पटना के पास हाजीपुर में सत्तू ड्रिंक बनाना शुरू कर दिया है. ये काम वो अपने कोरियाई अमेरीकी मित्र जॉन डब्लू चे और विलियम आर कुमार के साथ मिलकर कर रही हैं.
इस पाउडर में वो बहुत सारे अनाज मिला कर रही हैं.
जॉन डब्लू चे कहते हैं, “हम इसको आपदा के वक्त के खाने की तरह विकसित करना चाहते हैं. जहां कहीं भी आपदा हो, भुखमरी हो वहां हमारी संस्था ‘बिनचे’ इसे मुफ़्त बांटेगी.”

 

हाल ही में जब पटना के पास गंगहारा गांव में आग लगी तो ग्रेस ली ने अपना ये उत्पाद गांव वालों में बांटा. हालांकि ग्रेस ली के इस नए काम ने उनके सत्तू के कारोबार में ब्रेक लगा दिया है. ऐसे में उनके कोरियाई दोस्त थोड़े परेशान भी हैं.
ग्राहक किम सुंग सु कहते हैं, “बाज़ार में सत्तू मिलता है. लेकिन ग्रेस ली वाले सत्तू जैसी शुद्धता नहीं होती.”
अपने पुराने ग्राहकों को निराश करने का दुख ग्रेस ली के चेहरे पर भी झलकता है.
वो कहती है, “थोड़ा इंतजार कर लीजिए, वक्त मिलने पर फिर तैयार करेंगे सत्तू. आख़िर मैं भी तो आपकी तरह सत्तू की दीवानी हूं.”

 

जब ग्रेस के पति यांज ली पटना उच्च शिक्षा के लिए आए थे तभी से ली परिवार का बिहार से रिश्ता जुड़ गया।  1997 में यांज ली से शादी करके ग्रेस ली भी पटना आ गईं.

उसके बाद उन्होंने हिन्दी सीखी और बिहार की संस्कृति को नज़दीक से देखा।  बिहार उनको भा गई।  बिहार को ही अपना घर बना लिया।  बिहार से इतना प्रभावित है कि ग्रेस ली हंसते हुए कहती भी हैं, “मैं आधी बिहारी हूं.”।

Source: BBC

 

 

Facebook Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Time limit is exhausted. Please reload CAPTCHA.