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खबरें बिहार की

खुशखबरी: बिहार के किसानों के लिए एक बडी खबर

पटना: किसान के लिए उसका जमीन ही उसका भगवान होता है और  वही उसका रोजी-रोटी होता है।  किसी भी किसान के लिए उसका जमीन ही उसका सबकुछ होता है।  सोचिये किसी किसान से उसका जमीन ही छीन लिया जाय तो उस पर क्या बीतेगी?  इसिलिए जब भी किसी काम के लिए किसानों से जमीन ली जाती है तो किसान और सरकार के बिच मतभेद की खबर आती है और मामला कोर्ट तक पहुंच जाती है।  

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इसलिए विकास की योजनाएं जमीन के विवाद में नहीं फंसे, इसके लिए बिहार सरकार ने नया उपाय किया है। जो विभाग या एजेंसी जमीन लेगी, उसे जमीन मालिक को सरकार द्वारा तय जमीन की कीमत का चार गुना दाम देना पड़ेगा।

जमीन नहीं मिलने के चलते सड़क, बिजली, रेलवे आदि की कई योजनाएं पूरी नहीं हो पा रही हैं।
कई योजनाएं तो जमीन के छोटे से हिस्से के चलते अधूरी हैं। दरअसल, जमीन मालिकों को अभी का मुआवजा दर मंजूर नहीं है।

फिलहाल कई जिलों में जमीन का मुआवजा 2012 के सर्किल रेट पर दिया जाता है। नतीजा, जमीन मालिक पुरानी दर पर न तो मुआवजा ले रहे हैं और न ही जमीन दे रहे हैं।

 

 

मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह ने खासकर केंद्रीय एजेंसियों से कहा है कि चार गुना दाम के हिसाब से पहले संबंधित जिले के डीएम के पास एकमुश्त राशि जमा करें, फिर जमीन अधिग्रहण का काम हो। 1 जनवरी 2014 के प्रभाव से देना होगा दाम…

क्योंकि बिहार में 1 जनवरी 2014 के प्रभाव से नई भू-अर्जन अधिनियम लागू है। इसी में जमीन मालिक को सरकार द्वारा तय जमीन की कीमत का 4 गुना दाम देने की बात है। यह बिहार सरकार का अपना कानून है। इससे मुआवजा के मामले में यहां के जमीन मालिकों को ताकत मिली है।’

 

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के प्रधान सचिव व्यास जी ने भी नए दर पर जमीन मालिकों को रुपए देने की बात केंद्रीय एजेंसियों से कही है।

 

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री नीतीश दिल्ली में केंद्रीय मंत्रियों के साथ बैठकों में भी  इसी हिसाब से किसानों को जमीन की कीमत देने की बात लगातार कहते रहे हैं।

सूत्र मुताबिक  खबर है कि केंद्रीय एजेंसियां भी नए दर से जमीन का मुआवजा देने को तैयार हैं।

 

जमीन अधिग्रहण नहीं होने से बिहार में फंसी योजनाएं

रेलवे
– खासकर हाजीपुर और सुगौली

सड़क पुल
– बख्तियारपुर-ताजपुर
– सुल्तानगंज-अगवानी घाट
– बलुआहा घाट पुल का एप्रोच रोड
– कच्ची दरगाह-बिदुपुर (बड़ा हिस्सा)
– दीघा-पहलेजाघाट (अब सलटने को है विवाद)
– गंगा पथ (विवाद से बचने को तलाशा जा रहा नया उपाय)

 

एनएच/एसएच (सड़क) की
– पटना-गया-डोभी
– हाजीपुर-छपरा
– हाजीपुर-मुजफ्फरपुर (कुछ हिस्सा)
– पटना-आरा-बक्सर
– बख्तियारपुर-सिमरिया

 

बिजली परियोजनाएं
– नवीनगर
– कजरा
– पीरपैती
– चौसा (कुछ हिस्सा)

 

सरकार के तरफ से यह अच्छी पहल है।  इससे विकाश कार्यों में जमीन विवाद के कारण रूकावटें कम आएगी और किसानों को जमीन का उचीत दाम मिल सकेगा।

 

 

 

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