बिहारी विशेषता राजनीति

क्या बिहार बीजेपी में मोदी युग का अंत हो गया??

पटना: बिहार की राजनीति में एक बात की चर्चा आज कल खूब हो रही है कि क्या बिहार बीजेपी में मोदी युग का अंत हो गया?? 

 

सुशील मोदी जी का राज्यसभा में नही जाना बिहार बीजेपी में एक नये युग कि शुरुआत मानी जा रही है। हालांकि कई लोग इस बात से सहमत नहीं हो सकते है मगर बीजेपी को करीब से जानने वालों कि माने तो यह मोदी युग के अंत की शूरुवात हो गई है।

 

1990 के बाद बिहार बीजेपी में ऐसा पहला मौंका है जब मोदी के इक्छा के विपरीत केन्द्रीय नेतृत्व ने मोदी के घोर विरोधी माने जाने वाले गोपाल प्रसाद सिंह को राज्यसभा का टिकट दिया है, जबकि बिहार से सिर्फ सुशील मोदी का ही नाम दिल्ली गया था और ये भी तय माना जा रहा था कि मोदी के दिल्ली पहुंचते ही केन्द्रीय मंत्रीमंडल में होने वाले बदलाव में मोदी का मंत्री भी तय माना जा रहा था।

हाल ही में राजभवन में आयोजित एक कार्यक्रम के कई बड़े राजनीतिज्ञों ने मोदी को उसी अंदाज में बधाई भी दिया था।

 

तीन दिन पहले बीजेपी कार्यालय में मीडियाकर्मियों को केन्द्र सरकार के दो वर्ष पूरे होने पर दावत पर बुलाया था उसमें जिस अंदाज में मोदी मीडियाकर्मियों से मिल रहे थे और मुस्कुरा रहे थे उस वक्त उनके चेहरे के भाव से साफ झलक रहा था कि वो बिहार छोड़ने का मन बना चुके हैं क्योंकि कोई सोच भी नहीं सकता था कि मोदी के न चाहते हुए किसी दूसरे को राज्यसभा का टिकट मिल जायेगा और यही वजह रही कि सभी मीडिया मोदी को उम्मीदवार घोषित कर दिया था।

 

बिहार चुनाव बाद से ही मोदी का कद छोटा करने का प्रयास किया जा रहा था। इसके कई कारण है जैसे नीतीश कुमार के करीबी होना,  आडवानी खेमे का सदस्य होना और सबसे बडी बात बिहार में लालू – नीतीश के समान बीजेपी का कोई चेहरा न होना।

 

मोदी को दरकिनार करना इतना आसान नही होगा,,, वैसे बीजेपी को बिहार में लालू और नीतीश के मुकाबले खड़े होना है तो कठोर फैसला तो लेना ही होगा चाहे इसके लिए बड़े से बड़े नेता कि कुर्बानी ही क्यों ना देना पड़े।।

 

मगर अब यह देखना भी बडा दिलचस्प होगा की बीजेपी बिहार में अपना कमान किसको देगी जो बीजेपी लालू – नीतीश की जोडी को टक्कर दे सके।

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