बिहार की ये 7 बेटियां जिन पर है हर बिहारियों को गर्व।

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1. गुड्डी

 

खुदी को कर बुलंद इतना कि खुदा पूछे, बता तेरी रजा क्या है?’

 

मुज़फ़्फ़रपुर जिले के मोतीपुर प्रखंड अंतर्गत डकही गांव की ‪गुड्डी‬ ने इसे साबित कर दिखाया है। 6 वर्ष की उम्र में सिर से माता-पिता का साया उठ जाने के बाद एक रिश्तेदार ने शरण भी दी तो घास काटने में लगा दिया। उस कार्य काे भी मन से अंजाम देने लगी। लेकिन, लक्ष्य कुछ और था। हौसले साथ। पढ़ाई और कराटे को भविष्य बनाई। प्रखंड से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक प्रथम स्थान पाईं।

 

आज यह चैंपियन कस्तूरबा विद्यालयों के माध्यम से बिहार के 38 जिलों में लड़कियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कराटे का प्रशिक्षण दे रहीं। फिलहाल इंटर में पढ़ रही। आईपीएस अफसर बन गरीबों का हमकदम बनना चाहती हैं। वाकई यह लड़की उन सबके लिए प्रेरणास्रोत है जो अभावों का रोना रोते हैं। गुड्‌डी के पिता रामाशीष भगत की मौत 2005 में हो गई थी। मां गुड्डी और उसकी छोटी बहन को लेकर मायके चली गई। छह माह में वह भी चल बसीं। छह वर्ष की गुड्डी ने मुखाग्नि दी। इसके साथ ही कुछ कर गुजरने की शपथ ली। उसका कहना है कि कुछ दिन ननिहाल में रहने के बाद छोटी बहन के साथ गांव लौटी तो चाचा ने प्रवेश से मना कर दिया।

 

पांचवें दिन एक मुंहबोली मौसी सुनीता देवी ने वहीं अपने घर में रख लिया। वह गुड्डी को घास काटने में लगा दी। सुनीता के बच्चों को पढ़ते देख मन पढ़ने को करता था। कस्तूरबा गांधी स्कूल के सामने शिव भगत नामक एक साधु की कुटिया थी। बाबा उसे स्कूल वार्डेन लक्ष्मी दीदी के पास ले गए। मौसी से पूछा तो इनकार कर दिया। फिर दोनों ने व्यक्तिगत जिम्मा पर उसे स्कूल लाया। स्कूल में छठी कक्षा से ही पढ़ाई की व्यवस्था थी। वार्डेन दीदी ने एक साल तक उसे दिन-रात पढ़ाकर अगले साल छठे वर्ग में नामांकन कर लिया।

 

विद्यालय में कराटे सिखाया जाता था। गुड्‌डी का उसमे ज्यादा आकर्षण था। 2012 में प्रखंड स्तर की प्रतियोगिता में प्रथम आई। 2013 में जिला राज्य दोनों स्तरों पर प्रथम स्थान मिला। राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता के लिए सूबे की 10 लड़कियों में चयन हुआ। दिल्ली में भी 2014 में उसने झंडे गाड़े। घास काटनेवाले वह लड़की नेशनल गेम्स में प्रथम आई। प्रतियोगिता में उसे शीर्ष पुरस्कार से नवाजा गया। गुड्‌डी की उक्त सफलता के बाद बिहार के समाज कल्याण शिक्षा विभाग समेत कई सामाजिक संगठनों ने भी सम्मान पुरस्कार दिए। आठ मार्च 2015 को पटना में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी सम्मानित किया। अब तक वह पांच दर्जन से ज्यादा मेडल, प्रशस्ति पत्र शील्ड पा चुकी हैं।

 

2. Proffesor Savita Singh

 

Prof Savita Singh has emerged as the leading creative signatures from Bihar. A non-resident Delhi based Bihari, she is one of the youngest professors in the School of Gender and Development Studies, IGNOU currently.

 

Besides her powerful academic credentials, Savita has various collections of poetry in Hindi, English and French released by the leading publishers in the country. Her work is translated in most of the Indian and foreign languages such as French, Spanish, German and Dutch.

 

She is a recipient of Hindi Academy’s award and Indo-French Raza Award for poetry.

 

3. Shilpa Shukla

 

Shilpa Shukla, the film, television and theatre actress was born in Vaishali into a Bihari Bhumihar background. She was brought up in Gujarat, Kolkata and in New Delhi. She pursued her education from the prestigious Delhi Public School, situated at R. K. Puram. Soon after her twelfth boards, she enrolled herself in the Miranda House at the University of Delhi.

Shilpa began her career with Maharaj Krishna Raina, the renowned theatre artist. Later on she also worked with Arvind Gaur, the director of the Asmita Theatre Group. Some of her notable plays are ‘Final Solutions and Tara’ by Mahesh Dattani, ‘Antim Diwas’ by Govind Deshpande, ‘Ek Mamooli Aadmi’ by Ashok Lal, ‘Log-Baag’ by Neil Simon and ‘Rakt Kalyan’ by Girish Karnad.

Her very first film in the industry was Sabiha Sumar’s 2003 flick titled ‘Khamosh Pani’, starring Shilpa Shukla along with Kiron Kher and Aamir Malik. Same year she had also signed up for Sudhir Mishra’s film ‘Hazaaron Khwaishein Aisi’, starring Chitrangada Singh, Kay Kay Menon, Ram Kapoor, Saurabh Shukla, Shiney Ahuja and Shilpa Shukla herself. Next up she received a considerable amount of recognition from the Shahrukh Khan starrer ‘Chak De India’ (2007), where she portrayed the stubborn and arrogant role of a hockey player by the name of Bindia Naik. She earned a Filmfare nomination as well as a National Film award consideration, for her role in this film.
In the year 2012, she appeared in ‘B. A. Pass’ directed by Ajay Bahl and starring Dibyendu Bhattacharya, Rajesh Sharma, Shadab Kamal and Shilpa Shukla. This film was based on the story called ‘The Railway Aunty’, written by Mohan Sikka. This movie received the Best Film Award (Audience Choice) at the SAFF (South Asian Alternative Film Festival) held at Paris in France. At the 12th Osian Cinefan Film Festival, ‘B. A. Pass’ was given the title of the Best Film in Indian Competition.
Shilpa Shukla had also starred in ‘Rajdhani Express’, directed by Ashok Kohli and starring Leander Paes, Gulshan Grover, Jimmy Shergill, Pooja Bose and many more. This film failed to create much of a buzz at the box office.
Awards:
1) In the year 2008, Shilpa Shukla was awarded the prestigious Starscreen Award in the Best Supporting Actor category for ‘Chak De India’.
2) Same year she had also received numerous nominations at the Filmfare Awards, International Indian Film Academy Awards (IIFA), Producer Guild Awards and Zee Cine Awards, all for her role of Bindia Naik in ‘Chak De India’.

4. शिंजनी कुमार

पटना वीमेंस कॉलेज से पढ़ाई करने वाली समस्तीपुर की शिंजनी कुमार जल्द ही पेटीएम बैंकिंग सेवा की सीइओ बननेवाली हैं. यह न सिर्फ बिहार के लिए गर्व की बात है, बल्कि बिहार की लड़कियों के लिए प्रेरणा प्रदान करनेवाली खबर है.
अक्सर चंदा कोचर, इंद्रा नूयी, अरुंधति भट्टाचार्य के प्रमुख पदों पर पहुंचने काे महिलाओं के सशक्तीकरण के तौर पर पेश किया जाता है, लेकिन अगर बेहद सामान्य और पिछड़े राज्य की कोई महिला सामाजिक और आर्थिक बाधाओं को पार करते हुए किसी अहम पद पर पहुंचे,तो यह वाकई समाज के लिए नजीर है. हाल में टीमलीज के आये सर्वे में बैंकिंग, इंश्योरेंस, वित्तीय संस्थानों में प्रमुख पदों पर महिलाओं की संख्या काफी कम होने की बात सामने आयी है.
लेकिन,अच्छी खबर यह है कि बिहार जैसे पिछड़े प्रदेश की सामान्य परिवेश में पली-पढ़ी एक लड़की एक महत्वपूर्ण बैंकिंग सेवा पेटीएम की प्रमुख पद पर काबिज हाे रही है. समस्तीपुर के पुनास गांव में एक किसान परिवार में पैदा हुईं शिंजनी कुमार ने लखीसराय के बालिका विद्यापीठ से पढ़ाई के बाद पटना वीमेंस कॉलेज से अंगरेजी में ग्रेजुएशन किया. उसके बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से अंगरेजी में एमए और फिर अमेरिका के टेक्सास यूनिवर्सिटी के लिंडन जॉनसन स्कूल से पब्लिक पॉलिसी में
एमए कोर्स किया.
पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए वह बालिका विद्यापीठ की प्रिंसिपल भी बनीं. उनके पिता कोल इंडिया में काम करते थे. अमेरिका से डिग्री हासिल करने के बाद मार्च 1992 में वह रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया में डिप्टी जनरल मैनेजर बनीं और नवंबर 2007 तक इस पद पर रहीं. इसके बाद उन्होंने दिसंबर, 2007 में अमेरिका की वित्तीय संस्था मेरिल लिंच कंट्री कंपलायंस हेड के तौर पर जुड़ीं और अक्तूबर,2007 तक यहां रहीं. अक्तूबर,2010 में प्राइस वाटर्सकूपर में डायरेक्टर के पद पर काम किया. मौजूदा समय वे प्राइस वाटर्सहाउस कूपर्स(पीडब्लूसी) में कार्यकारी निदेशक के पद पर हैं. अब शिंजनी कुमार का पेटीएम पेमेंट बैंक की सीइओ बनना तय है. इस बारे में जब पेटीएम के प्रवक्ता से पूछा गया, तो उन्होंने इस खबर का न तो खंडन किया और न ही इसकी पुष्टि. शिंजनी के मार्च में पेटीएम बैंकिंग के साथ जुड़ने की पूरी संभावना है.
पेटीएम जून में शुरू करेगी बैंकिंग सेवा
चीन के उद्योगपति जैकमा की कंपनी अलीबाबा समर्थित पेटीएम जून में बैंकिंग सेवा शुरू करने वाली है. रिजर्व बैंक ने रिलायंस, एयरटेल, वोडाफोन, आदित्य बिरला ग्रुप समेत 11 कंपनियों को बैंकिग सेवा शुरू करने की मंजूरी पिछले साल दी है. इसमें पेटीएम को बैंकिंग सेवा शुरू करने का लाइसेंस दिया है. शर्तों के मुताबिक पेमेंट बैंक के पास 100 करोड़ की पूंजी होना अनिवार्य है. पेटीएम पेमेंट बैंक के लिए पूंजी की तलाश में कई निवशकों से बातचीत कर रहा है. पीडब्लूसी से शिंजनी पांच साल से जुड़ी रही हैं और बैंकिंग, कैपिटल मार्केट और वित्तीय सेवाओं की प्रमुख रही हैं.
सूत्रों का कहना है कि पेटीएम बिहार और झारखंड पर फोकस कर रही है, जहां बैंकिंग सेवाओं की पहुंच सीमित है. बैंक ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने पर खास तौर पर ध्यान केंद्रित करेगी और महिला समूहों को वित्तीय मदद पहुंचाने की पहल करेगी.

5. Aishwarya Sushmita

After battling it out for 10 weeks, Kingfisher finally crowned the winner of Kingfisher Supermodels 3 to Ashwarya Susmita who is from Darbhanga, Bihar.
Aishwarya Sushmita is a combination of talent and beauty. An avid singer, a belly dancer, and a national level badminton player, Aishwarya has done it all.
The sixth season of the Supermodel hunt saw 10 aspiring models heat the battle field with their confident strut and Aishwarya Sushmita was declared the winner. That’s the least one can expect from someone whose name is derived from two of the country’s most well known beauty queens.
Actress and stylista Neha Dhupia, Mohan Neelakantan, consulting fashion editor of NDTV Good Times, and ace photographer, Atul Kasbekar judged this year’s edition of the contest.
An ex-student of Delhi University, Aishwarya Sushmita won the challenge that was spread over a period of 10 weeks.

6. Hansa Sinha
This woman entrepreneur from Patna is making waves

“Every successful woman — leader, housewife, social worker, actress, novelist, teacher, and entrepreneur — inspires me; all of them have a special story behind their success.”

Entrepreneur Hansa Sinha has a special story too, one with many interesting elements. She studied in school with Mahendra Singh Dhoni, almost died due to an abscess in the lungs while in college, and joined hands with her competitor to start her company Genesys. A daughter, wife, and mother, she has lived life on her own terms.

Hansa’s commendable resilience, ability to doggedly work hard, and change things for the better have taken her ahead in life. HerStory spoke with Hansa Sinha to know more about her life and what keeps her going.

Born in 1980 in Patna, Hansa grew up like many others her age. Her childhood was about sibling fights for the bigger piece of chicken, or sitting in the front of their father’s bike, or an extra glass of Rasna.

From nursery to class 7th she studied in Notre Dame Academy, Patna. With her father’s transfer to Ranchi, who was working in a bank, Hasna joined St. Francis to complete her schooling. She moved to D.A.V. Shyammali, in Ranchi for class 11th and 12th and studied humanities, developed a love for basketball and played at the zonal and national level. She, along with Mahinder Singh Dhoni, was the school’s sports co-ordinator. Happily recalling that time, she says: “I remember our sports day at Macon Stadium, Ranchi, where I had marched together with Mahi (Dhoni) and ran a relay race too.”

She moved back to Patna for graduation, where she studied advertising, sales promotion, and sales management from Patna Women’s College. It was here that she was diagnosed with an abscess in her lungs. And the recovery journey was a difficult one: “My bones were cut to insert a pipe to free my lungs from the yellow liquid. It was very painful. I had near-death experiences twice — once in the OT and second time when my illness reoccurred, even after two operations.”

Her parents had lost all hopes of her recovery. “The support of friends and relatives who in different ways were there for us made me realize the importance of relationships and bonding. I promised to myself that I would leave no stone unturned to nurture relationships that are close to my heart. My illness gave me a clear message: Always expect the unexpected, fight against the odds, and value relationships be it blood relations or self-made,” says Hansa.

It took her almost a year to recover. Hansa later appeared for her second and third year examinations together, and cleared both with flying colours.

Following her post-graduation in mass communication from Bharitya Vidya Bhawan, Kolkata, in 2004, she joined Shopper’s Stop the same year. A year later, she was working with the recruitment consultancy Ma Foi (now Randstad). Soon she got married and was in the family way, and left Ma Foi but rejoined them in 2008.

Hansa has handled pan India clients and done the key account management for big brands like Unicef and the Health and Education Department, Bihar. She has also handled multiple types of recruitment and training assignments, prepared tender documents, prepared competitive quotes, served as a head on assignments, and, of course, generated good revenue. “I worked on Saturdays, Sundays, and other holidays to manage the turnaround time of my assignments,” says Hansa.

In January of 2011 she co-founded Genesys Consulting Pvt. Ltd along with Parimal Madhup, who was a competitor during her Ma foi days. “A government recruitment project was distributed between two
firms, mine and Parimal’s. Both of us were heading the project.” Hansa’s branch head left her mid-way in this government project.. Nor did she receive any support from her head office. Parimal helped her out. By this time Hansa had decided to quit and move on. She and Parimal joined hands to start their own business.

7. गुंचा सनोबर

पिछले दिनों यूपीएससी के घोषित परिणाम में एक ऐसा इतिहास रचा गया जिसका इंतजार दशकों से था. गुंचा सनोबर बिहार की पहली मुस्लिम महिला आईपीएस बनने जा रही हैं.
सनोबर को यूपीएससी के सिविल सर्विसेज परीक्षा में 424 वां रैंक मिला है और इस तरह वह बिहार की पहली मुस्लिम आईपीएस होने का गौरव प्राप्त करने वाली हैं.
हालांकि इससे पहले बिहार की ही सहला निगार 2010 में आईएएस बन चुकी हैं.
2014 के सिविल सेवा परीक्षा में देश भर से कुल 37 छात्र सफल रहे हैं इनमें बिहार की गुंचा सनोबर के अलावा नबील अहमद रैंक 262 और मुदस्सर शरीफ रैंक 420 भी इस परीक्षा में कामयाब रहे हैं.
पिता आईपीएस, बहनें डॉक्टर
गुंचा सनोबर पटना के तेज तर्रार सिटी एसपी रह अनवर हुसैन की बेटी हैं. सनोबर तीन बहनों में मझली हैं. जेबा परवीन और खुशबू यासमीन मेडिकल की पढाई कर रही हैं.
सनोबर की शानदार सफलता पर पिता अनवर हुसैन ने कहा कि रमजान और ईद का इससे बड़ा तोहफा और क्या हो सकता है.
अनवर मानते हैं कि सनोबर की सफलता मुस्लिम समाज की महिलाओं के लिए एक प्रेरणा साबित हो सकती है.
गौरतलब है कि मुसलमानों में शिक्षा की दर समाज के अन्य वर्गों की अपेक्षा कम है, ऐसे में सनोबर की सफलता एक मिसाल है.अनवर हुसैन मूल रूप से पश्चिम चम्पारण के रहने वाले हैं.
सनोबर ने इल्कट्रानिक्स में इंजिनियरिंग किया है. उन्होंने यह सफलता दूसरी कोशिश में हासिल की.
सनोबर को बिहार कैडर मिलेगा या नहीं, फिलहाल यह कहना कठिन है लेकिन उनका कहना है कि अगर मौका मिले तो वह बिहार की सेवा जरूर करना चाहेंगी.

© साभार : Blog Aao Bihar

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