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  • Budha Mahotsva Gaya
    3 weeks ago by aapnabihar Budha Mahotsva, Gaya.
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    3 weeks ago by aapnabihar भारत ने जीता अंडर 19 विश्वकप। बिहार के अनुकूल रॉय बने पूरे सीरीज में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज।
  • Amazing view of new station road flyover of Patna
    2 weeks ago by aapnabihar Amazing view of new station road flyover of Patna.
  •          !!
    6 days ago by aapnabihar महाशिवरात्री के अवसर पर निकला शिव बारात। हर-हर महादेव !!
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    3 weeks ago by aapnabihar इस बार झारखंड की कुल आबादी से भी अधिक पर्यटक पहुंचे बिहार। जय बिहार!
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    1 week ago by aapnabihar हर-हर महादेव बोलो..! तस्वीर मुजफ्फरपुर के प्रसिद्ह भैरवस्थान मंदीर की है।
  • Tag a Bihari girl
    3 weeks ago by aapnabihar Tag a Bihari girl. .
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    2 weeks ago by aapnabihar अंडर 19 क्रिकेट विश्वकप विजेता भारतीय टीम के कप्तान पृथ्वी शॉ भी बिहारी है। बहुत ही कम लोगों को यह पता है कि यह चमकता सितारा गया के मानपुर का रहने वाला है। जय बिहार!
  • Name of this vegetable?
    1 week ago by aapnabihar Name of this vegetable?
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    2 weeks ago by aapnabihar बिहार के आनंद कुमार के रोल में नजर आयेंगे ऋतिक रौशन।  #AnandKumar   #Super30   #AapnaBihar   #Bihar 
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    1 week ago by aapnabihar बिहार के पटना जिला की निवासी और आजतक की मशहूर एंकर श्वेता सिंह को ENBA (Exchange4media News Broadcasting Awards) 2018 में सर्वश्रेष्ठ हिंदी एंकर और सर्वश्रेष्ठ स्पोर्ट रिपोर्टिंग का अवार्ड दिया गया है।

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यह बिहारी दिल्ली के फुटपाथ पर गरीब बच्चों को पढाता है

दिल्ली: कहते है न कुछ करने के लिए किसी चीज की जरूरत नहीं होती बस नीयत ही काफी है। मंशा जो आपको कहीं से कहीं पहुंचा सकती है. बिहार प्रांत के रहने वाले श्याम बिहारी प्रसाद बीएसएनएल में असिस्टेंट जनरल मैनेजर पद पर कार्यरत थे. वे साल 2013 में रिटायरमेंट के बाद दिल्ली चले आए. रिटायरमेंट के बाद वे सड़क पर बच्चों को पढ़ाने का काम करते हैं.

हर सुबह बच्चों को पढ़ाते हैं…

उनके पास बच्चों को पढ़ाने के लिए बेसिक सुविधा भी नहीं है. वे बच्चों को सुबह 8 बजे से 11 बजे के बीच पढ़ाते हैं. वे कहते हैं कि शुरुआत में तो बच्चे बुलाने पर भी नहीं आते थे. वे बच्चों को चॉकलेट और गिफ्ट्स देकर अपने पास बुलाते थे. अब कई लोग उनकी मदद के लिए तत्पर हैं और बहुतों ने चटाई, कॉपी-कलम, ब्लैकबोर्ड, किताबें और अन्य सामान देकर मदद की है।

 

मंदिर आने-जाने के क्रम में आया आइडिया…

स्वास्थ्य को बरकरार रखने के लिए वे रोज अपने नजदीक के मंदिर और पार्क में टहलने जाया करते थे. वहां उन्हें रोज कुछ बच्चे मिलते थ, जो पास की ही झुग्गी-झोपड़ियों में रहते थे. वे उनसे रोज ही कुछ खाने-पीने के लिए मांगा करते. उन्होंने इन बच्चों को पढ़ाने-लिखाने का निर्णय लिया.

साथ ही वे कहते हैं कि यह कठिन दौर है और बच्चों के सामने भारी चुनौति हैं और सिर्फ शिक्षा ही उनके बेहतर भविष्य के मार्ग खोल सकती है.

 

(News source: Aaj tak)

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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